Sunday, February 2, 2014

धरने पे धरना
अन्ना का बोलबाला, भ्रष्टाचारियों का मुंह काला...............................
लोकपाल लाओ, भ्रष्टाचार भगाओ.....................................जैसे नारों की गूंज से एक धरना पार्टी का आगाज़ हुआ। कभी शीला दीक्षित के घर के सामने धरना दिया तो कभी पुलिस थानों के सामने। भई! कुछ भी कहो धरना देने में तो आप का कोई जवाब ही नहीं है। धरने पे धरना करके ऐसा चमत्कार किया कि बाकी पार्टियों को जमीन पर ला धरा। लोगों के दुख-दर्द दूर करने वाले धरना महाराज ने तो मुख्यमंत्री पद की शपथ भी धरना स्थल पर ही ली।
देखो, खुद धरना करो तो ठीक है लेकिन अब मुख्यमंत्री जी सोचते है ये अच्छी मुसीबत मोल ली।  धरने की परंपरा तो गले की फांस ही बन गई। आज डीटीसी कर्मचारी धरने पर है कल सब्जीमंडी वाले धरने पर जाऐंगे और सुना तो कुछ ऐसा है कि मुख्यमंत्री जी की लाडली ऑटो सेना परसों धरने पर जाएगी। भई! सच बात तो ये है कि भारत का नाम न तो सचिन तेंडुलकर ने ऊँचा किया और न ही अमिताभ बच्चन ने। नाम तो देश का धरने वालों ने रोशन किया। सूत्रों से उड़ती-उड़ती खबर मिली है कि जंतर-मंतर और रामलीला जैसे धरना स्थलों पर कोचिंग सेंटर खुलने जा रहे है।
‘‘शांति से बैठने में फेल तो सीधा धरना पास डिग्री ले जाइये’’- धरना कोचिंग वाले
 (नोट- धरना स्थल का सारा कॉपीराइट सिर्फ हमारे पास है और हमारी कहीं और कोई शाखा नहीं है।)
मुझे तो ड़र इस बात का है कि कहीं चिंटू की मम्मी द्वारा पिंटू के पापा को आँख मारने पर सोसाइटी की सारी मम्मियाँ धरने पर न बैठ जाए और मांग करें कि आँख मारने पर गाइडलाइंस बनाई जाए।

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