Thursday, January 16, 2014

व्यक्ति बनाम मुद्दे की बहस

राजनीतिक दल माने या न माने पाँच राज्यों में विधानसभा के चुनाव लोकसभा के लिए सेमीफाइनल माने जा सकते है। आम आदमी पार्टी की तरफ से अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनाव का प्रमुख चेहरा बनाए जाना एक उचित कदम है। केजरीवाल एक ऐसे नेता है जिसकी तरफ महंगाई से त्रस्त जनता सुशासन के लिए टकटकी लगाए देख रही है। आप ने राजनीति की परिभाषा ही बदलकर रख दी और पुराने ढ़र्रे पर चल रही कांग्रेस-बीजेपी को अपनी नीतियों की तरफ सोचने पर मजबूर कर दिया। जाति, धर्म, और क्षेत्र की राजनीति से ऊपर उठकर आप ने मुद्दे और विचारधारा की राजनीति को नेपथ्य से निकालकर नीतियों के सर्वप्रमुख बिंदु के रुप में सामने रखा।
पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को इतनी बुरी शिकस्त मिली कि उसने एक बूंद पानी तक नहीं मांगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी बगावत पर उतर आए है और पार्टी को आमूल-चूल बदलाव की नसीहत तक दे रहे है। राहुल गांधी स्वयं आप से सीख लेने की बात कह रहे है। लेकिन इन चुनावों में बीजेपी के उत्तम प्रदर्शन का कारण भी यह नहीं था कि वह एक अच्छी पार्टी साबित होगी या उसने अपने काम से जनता का दिल जीत लिया हो। बीजेपी की जीत का कारण किसी अन्य राजनीतिक पार्टी का विकल्प न होना रहा। 'आप' ने लोगों को एक विकल्प दिया है कि वह पुराने ढर्रे पर चली आ रही पार्टियों को अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव के लिए विवश कर सकें। आप में वो बात है कि वह राजनीति में कांग्रेस-बीजेपी के एकछत्र राज को समाप्त कर सकें। केवल भ्रष्टाचार, महंगाई जैसे मुद्दों की वजह से ही कांग्रेस नहीं हारी बल्कि आम जनता की अनदेखी और उन्हें सिर्फ वोट पाने का हथियार समझने के कारण पराजित हुई। राजनीति की जमीन पर वोट की फसल पैदा करने के एकमात्र उद्देश्य वाली इस पार्टी को मतदाताओं ने इलहाम करा दिया कि वो उसके हाथ का चाबुक नहीं बनेंगें। 2013-14 को दौर 1947 की तरह है जब ब्रिटिश राज के खात्मे के लिए जनता स्वतंत्रता की लड़ाई में कूद पड़ी। आज फिर वहीं स्थिति है जब विभिन्न जनांदोलन से जनता का आक्रोश सामने आ रहा है। कांग्रेस-बीजेपी की साम्प्रदायिक और कुशासन की राजनीति से तंग आ चुकी जनता उसकी नींव उखाड़कर फेंकने के लिए आतुर है।
आप ने लोकसभा चुनाव को मोदी बनाम राहुल की बहस से बाहर निकालकर व्यक्ति बनाम मुद्दे की बहस की शक्ल दी है। बिजली-पानी जैसे मुद्दों पर अपने वादे पूरे करके केजरीवाल ने उम्मीद की लौ जलाई है। राजनीतिक प्रतिबद्धता को प्रकट करती आम आदमी पार्टी को जरुरत है इसी तरह जनहित में काम करने की। आप ने खास न बनने का जो नया राजनीतिक चलन शुरु किया है उसे उसपर बने रहना होगा तभी आगे की ड़गर आसान होगी।


2 comments:

  1. बढ़िया मेहनत, बस इसी तरह लिखते रहिए |

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